Day: September 19, 2017

Poetry

Par Zindagi Chalti Rahi

घड़ी-घड़ी , क्षण- क्षण , कदम-कदम , पर छलती रही। खुद ही बनाया गूमड़, और उसे मलती रही। कई बार घेरे निराशा, और ये खलती रही। अब है खत्म कहानी या बाकी, असमंजस में डुलतीContinue reading