Day: September 18, 2017

Poetry

अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना है | अनुपमा वर्मा

स्वार्थ सिद्धि कर रहा धरा पर व्यर्थ बोझ तू स्वयं से आगे बढकर देख आएगा स्वयं के फिर करीब तू जब तलक प्राण शेष है कर दूसरो पर निसार तू अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना हैContinue reading

Love, Poetry

कलम और तुम | मिहिर पाण्डेय

क़लम में स्याही भर ली है। आज न जाने क्यूँ लिखने को दिल चाहा है। तुम्हारे लिए लिखूँ या तुमसे जुड़ी यादें लिखूँ। ऊँगलियाँ को थोड़ा संकोच है। तुम्हारे बारे में सच लिख नहीं सकता।Continue reading