Day: September 17, 2017

Ujjhan 'Stress' | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat, Love, Micro Tales

उलझन | अमन सिंह | #बेनामख़त

बस यह समझ लो कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ? हसूँ, मुस्कुराऊँ, रोऊँ या चिल्लाऊँ… कोई तकलीफ़ होती तो कहता, कोई दुःख होता तो ज़ाहिर करता लेकिन इस उलझन का क्याContinue reading

Matrabhoomi | Mid Night Diary | Shridhar Nath Gandhi
Poetry

मातृभूमि | श्रीधर नाथ गाँधी

धन्य हूँ में , इस धन्य धरा पर , मेंने जन्म लिया । जिसका शीष हिमालय , चरणों में सागर , मेंने ऐसी अनुपम धरा पर जन्म लिया । जहाँ राम हुए जहाँ बुद्ध हुएContinue reading

Love, Poetry

शायद प्यार | कुमार जीतेन्द्र

कुछ तो होगा तुझसे राबता (ज़ारा) वरना यू देख के चेहरा तेरा मैं मुस्कुरा गया कैसे ? कुछ तो तपिश रही होगी आँखों में तेरे बरना जाने पर मेरे आँखों में आंशु तेरे रह गयाContinue reading