Day: September 16, 2017

Roz Ki Bheed Bhaad | mid Night Diary | Pravin Pandey
Short Stories

रोज़ की भीड़ भाड़ | प्रवीण पाण्डेय

रोज़ की भीड़ भाड़ से कुछ अलग ही लग रही थी आज की भीड़ ट्रेन में… पता नहीं क्यूँ लोगों के चेहरे आज अच्छे नहीं लग रहे थे, और ना ही उनकी हँसी अच्छी लगContinue reading

Poetry

मानव नहीं मैं पेड़ हूँ | धर्मेंद्र सिंह

मानव नहीं ‘मैं पेड़ हूँ’ अभी बूढ़ा नहीं, अधेड़ हूँ। अभी तो बौर आया है, अभी तो सावन आया है, अरे! ये क्या? कुछ लोग आए हैं, कुछ औजार लाए हैं, मालिक भी साथ आयाContinue reading