Day: September 10, 2017

Poetry

कमीज | वैदेही शर्मा

आज फिर कमीज़ के जेब की सिलाई उधड़ गई। अभी परसों ही जो तुमने लगाई थी हर माह की तरह सोच रहा हूँ क्यों ना नई कमीज़ ख़रीद लूँ। मेरी सोचों सी पुरानी ज़र्ज़र कमीज़Continue reading

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वक़्त का बदलता मिज़ाज़ | अर्चना मिश्रा

आज तुम हो साथ, तो चाँद भी मुंडेर पर मुस्कुरा रहा है। क्यों ना तुम्हें देखते-देखते, मैं आज उसके सारे रंग अपनी आँखों में भर लूँ। आज तुम हो साथ, तो चाँद भी मुंडेर परContinue reading

Sawapan | Mid Night Diary | Surbhi Anand
Poetry

स्वपन | सुरभि आनदं

हवाओं में सन्नाटा धरती मेरे तले से गुम शायद तू आ रहा… केवड़ों की भीनीं-सी खुशबू पहचान गई तुम्हें कदमों की सरसराहट भाँप गई तुम्हें आँखें एैसे खुली थी, जैसे इनकी ओस को सिर्फ तुम्हारीContinue reading

Love, Poetry

क्यों | भावना त्रिपाठी

अग़र मुहब्बत नहीं तो निहारते हो क्यों, अगर मोहब्बत है तो छिपाते हो क्यों। मैं भी तो यही कहती हूं कि मुझे मोहब्बत नहीं तुमसे, फिर भी हर रात मेरे ख्वाबों में आते हो क्यों?Continue reading