Month: August 2017

Good Bye | Mid Night Diary | Amrit Raj
Love, Short Stories

गुड बाई! | अमृत

लैपटॉप बैग ले लिया, मोबाइल को जेब मे डाल लिया, जूते पहने, हमेशा की तरह फीते खुले ही थे! मैं बस निकलने को ही था, कि ध्यान आया, वपास जा शर्ट चेंज की और कालीContinue reading

Micro Tales

मरा पड़ा शरीर | विशाल स्वरुप ठाकुर

देश में यूँ तो बहुत गरीब गाँव हैं, लेकिन जिसकी बात में कर रहा हूँ, उसकी बात ही कुछ और है। जहाँ एक ओर अमीरी के लिए होड़ है, तो इन गांवों में देखा जाताContinue reading

Dasak Aazadi ko - Independence Day Special | Mid Night Diary | Ujjwal Kaushik
Short Stories

दशक आज़ादी को | उज्जवल कौशिक | इंडिपेंडेंट डे स्पेशल

उस रोज वह जल्दी उठ गया। उठते ही ना आव देखा ना ताव गिरता पड़ता घर के मुख्य दरवाजे की ओर भागा । काले रंग का बड़ा लोहे का दरवाजा जिसके भीतर से वह बाहरContinue reading

Ek Paigaam - Independence Day Special | Mid Night Diary | Bhavna Tripathi
Short Stories

एक पैगाम | भावना त्रिपाठी | इंडिपेंडेंट डे स्पेशल

जय हिंद दोस्तों , मेरे परिचय में बस इतना ही कहना चाहूंगा कि मैं इस भारत का बेटा हूं। मुझे जन्म तो मेरी मां ने दिया पर पाला यहां की धरती ने। जब मैंने आंखेंContinue reading

Main, Wo Aur Anhoni | Mid Night Diary | Piyush Bhalse
Short Stories

मैं, वो और अनहोनी | पियूष भालसे

मैं-अनहोनी होगी शायद वो- अनहोनी? कैसी अनहोनी? मैं-अनहोनी जैसी । । वो- क्या? मैं- जिसका सुनकर पलको की साँसे रुक जाये,वो झपकना बंद कर दे। मुँह खुला का खुला रह जाये। शब्द का दम भीContinue reading

Ibadat-e-ishq | Akanki Sharma | Writer Saahiba
Love, Micro Tales

इबादत-ए-इश्क़ | एकांकी शर्मा | राइटर साहिबा

बरकत हुसैन के इश्क़ में दीवानी हुई जाती थी। दोनों मोहब्बत में इतने मशगूल थे कि उनके लिए इश्क़ का मतलब ख़ुदा की इबादत करना हो गया था। जब सारा ज़माना नफ़रत की गिरफ़्त मेंContinue reading

Klaai - Rakshabandhan Special | Mid Night Diary | Aman Singh
Short Stories

कलाई | अमन सिंह | रक्षाबंधन स्पेशल

रोज की तरह आज भी ऑफिस के लिए निकला, फ़र्क सिर्फ इतना था कि आज मेट्रो में भी खालीपन सा था। रोज की तरह आज भीड़ नहीं थी। कुछ लोग थे हँसते, मुस्कुराते.. या यूँContinue reading

Kaanch | Friendship Day Special | Aman Singh | अमन सिंह
Short Stories

कांच | अमन सिंह | फ्रेंडशिप डे स्पेशल

लोगों का यह कहना कि मैं पत्थर हो गया हूँ, अब नहीं खलता और न ही अब कोई फर्क पड़ता है, इस बात से कि कोई क्या कहेगा? क्या सोचेगा? कभी सूरज को ढलते हुएContinue reading