Day: July 29, 2017

तुम्हारी डायरी
Micro Tales

तुम्हारी डायरी | आकाश शुक्ला | अस्तित्व

मुझसे बेहतर कौन समझेगा स्मृतियों को, लेकिन तुम्हे भी तो समझना था ! समझना था कि जब कोई एक स्मृति हम पर हावी होती है तो समस्त स्मृतियों को निगलने लगती, अपाहिज बनाने लगती. तुम्हारी नContinue reading

भावन त्रिपाठी
Micro Tales

दर्द भरी ख़ामोशी | भावना त्रिपाठी

वह गूंगा नहीं था, मगर इन बारह सालों में एक लफ्ज़ भी नहीं बोला था। वक़्त की मार ने उसके मुंह में ताले जड़ दिए थे। छः साल का असद ,जब भी अपनी बीमार अम्मीContinue reading