Day: July 26, 2017

वह कोई फूल नहीं मुट्ठी भर रेत हो।
Love, Short Stories

वह कोई फूल नहीं, मुट्ठी भर रेत हो | विशाल स्वरुप ठाकुर

सुबह सुबह का समय है। ओंस पड़ रही है। सारे फूल इन बूंदों से मुह धुल रहे हैं। नाराजगी अगर किसी में है तो वह गेंदा है। गुलाब के रेट बढ़ गये हैं। “अब सबContinue reading