Month: July 2017

Yeh Ishq Hai | Aman Singh
Benaam Khat

यह इश्क़ है | अमन सिंह | #बेनामख़त

सिगरेट का जलाना भूल भी जाऊँ, पर तुम्हारा यह कहना कि तुम्हारे दिल में मेरे लिए कुछ नहीं.. बहुत दर्द देता है। पर क्या करूँ, प्यार जो करती हूँ तुमसे और प्यार में दर्द नContinue reading

तुम्हारी डायरी
Micro Tales

तुम्हारी डायरी | आकाश शुक्ला | अस्तित्व

मुझसे बेहतर कौन समझेगा स्मृतियों को, लेकिन तुम्हे भी तो समझना था ! समझना था कि जब कोई एक स्मृति हम पर हावी होती है तो समस्त स्मृतियों को निगलने लगती, अपाहिज बनाने लगती. तुम्हारी नContinue reading

भावन त्रिपाठी
Micro Tales

दर्द भरी ख़ामोशी | भावना त्रिपाठी

वह गूंगा नहीं था, मगर इन बारह सालों में एक लफ्ज़ भी नहीं बोला था। वक़्त की मार ने उसके मुंह में ताले जड़ दिए थे। छः साल का असद ,जब भी अपनी बीमार अम्मीContinue reading

एक दिन की ख़ुशी
Short Stories

एक दिन की ख़ुशी | अलका

विनय और शोभी अपने बेटे रोचक के जन्मदिन की पार्टी में होने वाले खर्च का अनुमान लगा रहे थे। विनय ने मेहमानों की लिस्ट तैयार कर ली थी उनके लिए रिटर्न गिफ्ट देना और होटलContinue reading

वह कोई फूल नहीं मुट्ठी भर रेत हो।
Love, Short Stories

वह कोई फूल नहीं, मुट्ठी भर रेत हो | विशाल स्वरुप ठाकुर

सुबह सुबह का समय है। ओंस पड़ रही है। सारे फूल इन बूंदों से मुह धुल रहे हैं। नाराजगी अगर किसी में है तो वह गेंदा है। गुलाब के रेट बढ़ गये हैं। “अब सबContinue reading

लेकिन तब तक...
Love, Short Stories

लेकिन तब तक | आकाश शुक्ला | अस्तित्व

तुम्हारे साथ यहाँ, इस बहती नदी के पुल पर बैठ कर सूरज को खुले आसमां में अपने पंख खोलते देखना चाहती थी, लेकिन तुम्हारे बाद अब सिर्फ इसको बादल के समन्दर में डूबता हुआ देखनाContinue reading

Love, Short Stories

बेजान रिश्ता | अमृत

“तुम्हे देख कर यूँ लगता है..जैसे वक़्त में सफर कर रही हूँ..सादिया फिर से लौट आई हैं..” “वक़्त..ये वक़्त का ही तो सफर है जो आज हम यूँ..अजनबियों की तरह मिले है..” “तुम्हारी आँखें अबContinue reading

Short Stories

नन्नी सी जान | राघव भरत

ईशा और गौरव छोटे से खूबसूरत पहाड़ों से घिरे शहर  में रहते थे । एक शाम गौरव के ऑफिस से आने पर ईशा ने उसे खुशखबरी दी के घर में नन्हा मेहमान आने वाला हैContinue reading

Micro Tales, Short Stories

काली उदासी | पियूष भालसे

  “तुम आजकल इतने उदास क्यों रहते हो?” “तुम्हें पता है मेरे साथ काली उदासी रहती है। उसके साथ रहते-रहते मैं भी अब कुछ उदास सा रहने लगा हूँ।” ” पर तुम क्यों उदास हो?कोईContinue reading

Love, Short Stories

आँधियाँ घर नहीं बनाती | आकाश शुक्ला | अस्तित्व

पिछली बार जब वो आयी तो ठान के आयी थी कि उजाड़ के रख देना है सब कुछ,एक ही झटके में !! ये बात तुम क्यों नही मानना चाहते ? कितनी बार समझाया तुम्हे लेकिनContinue reading