Online Wali Mohabbat | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem

ऑनलाइन वाली मोहब्बत | मुसाफ़िर तंज़ीम

मैं टूटा हुआ था अंदर से
जब किसी खास ने साथ छोड़ दिया था
तन्हाईओं में कलम को साथी बनाया
और लिखने लगा दर्द अपना

कुछ दिन बाद ये दर्द पन्नो से होते हुए
Online plateforms की दीवारें रंगने लगा
कुछ लोग वाह वाही देते
कुछ लोग कुछ खुशनुमा लिखने को कहते

अब लेखक तो था नहीं मैं
इसलिए बस जज़्बात लिखता रहा
सोचा शायद दर्द कुछ कम हो जाएगा

लेकिन इस लिखने के चक्कर में
दर्द बढ़ता ही जा रहा था
मैं खोने लगा था उस दर्द की गहराई में
कुछ बड़े लोगों ने टोका
तो थोड़ा इधर उधर का लिख दिया

गलती से शायद थोड़ा अच्छा लिख दिया
तब किसी ने हौले से दस्तक दी
दिल के बंद पड़े दरवाजों पर

मेरी लिखी हर बात उसे अपनी लिखी लगने लगी
और उसकी लिखी हर बात मुझे अपने लिए लगती
धीरे धीरे दर्द की जगह इश्क़ ने ले ली

उसके लिए मैं एक दोस्त था
जिसका वो बेहद लिहाज़ करती थी
और मुझे हो गयी उससे online मोहब्बत

No exchange हो चुके थे
पर बात कम होती थी
Chating ज़्यादा होती थी
व्हाट्सएप फ़ेसबुक messanger
पर अपनी रातें कटने लगीं थी

Your quote पर उसके लिए
इश्क़ वाली शायरियाँ निकलने लगी थीं
पर उससे इज़हार नहीं किया था कभी

मुझे लगा इतना तो समझ ही गयी होगी
पर एक दिन कुछ रूठी से लगी मुझको
Reason मुझसे तो नहीं बताया
पर उसका feeling sad वाला status
हमको खतरे की घण्टी जैसा लगा

दो चार दिन तक वो ऑनलाइन नहीं आई
Call करने की मुझमें हिम्मत नहीं हुई
जब सब कुछ normal हुआ
तो मैंने prapose कर डाला

पहले 10 min तो कोई जवाब नहीं आया
फिर बोली अभी मैं रिलेशनशिप के लिए
बिल्कुल भी तैयार नहीं हूँ
तुम मेरे best friend हो

आगे अगर कभी मुझे लगा
कि मैं तैयार हूँ तो तुमसे जरूर बताऊंगी
अब दिन कटने लगे इंतज़ार में
और हम भी रहने लगे ऑफलाइन

कॉलेज में मेरी शायरियाँ
हवाओं की तरह गूँज रहीं थीं
जो छोड़ के गयी थी
वो भी साथ मे घूम रही थी

सबने घेर रखा था मुझे
अपने अपने proposal से
और मैं इंतज़ार में था
अपनी ऑनलाइन वाली मोहब्बत के।

 

-मुसाफ़िर तंज़ीम 

 

Musafir Tanzeem
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