Uljhane | Mid Night Diary | Krishan Kumar Pandey
Poetry

Uljhane | Krishan Kumar Pandey

जिंदगी की उलझनों से कुछ वक़्त मिला तो सोचा जिंदगी की उलझनों में क्या खोया क्या पाया है कोशिश की मुस्कुराने की हर ख़ुशी हर गम में कभी रुलाया है खुशियों ने तो कभी ग़मोंContinue reading

Coffee | Mid Night Diary | Amita Gautam
Poetry

Coffee | Amita Gautam

आंसू बहुत है मेरी आँखों में, तुम्हारे इंतज़ार की ही वजह है, शिक़वे भी बहुत है तुमसे मुझे, तुम मिलो तो सारे गिले दिखाऊ तुमको मै, पर अब हमारी मुलाकात मुझे वो अधिकार नहीं देगी,Continue reading

Paristhiti Aur Swabhav | Mid Night Diary | Abhishek Yadav
Poetry

Paristhiti Aur Swabhav | Abhishek Yadav

क्यूँ शांत हो तुम, मजे की बात है हँसते क्यूँ नही, क्या छिपा है तुम्हारे भीतर बतलाते क्यूँ नहीं । क्या बतलाऊँ मैं… शायद हमने खुद में हँसना,गाना,रोना सीख लिया है, शायद इन्हें चेहरे परContinue reading

Waham | Mid Night Diary | Akanki Sharma | Writer Saahiba
Poetry

Waham | Akanki Sharma | Writer Saahiba

मुझको अकसर आजकल ये वहम होता है शायद उसने मुझसे नाता तोड़ दिया है सालों सफ़र में वो साथ था मेरे पर अब शायद तन्हा छोड़ दिया है ये इलज़ाम था कि भरोसा तोड़ा हैContinue reading

Khamosh Lamhein | Mid Night Diary | Saransh Shrivastava
Poetry

Khamosh Lamhein | Saransh Shrivastava

पाकीज़गी से लबरेज़ वो वक़्त कितना खूबसूरत होगा ठिठुरती हुई ठण्ड में जब हम किसी दरिया किनारे ओस की बूंदों को आग से मिला देंगे और सुलगती हुई ठण्ड के साथ हम साथ में जिएContinue reading

Intzaar Aur Bebasi | Mid Night Diary | Shweta
Short Stories

Intzaar Aur Bebasi | Shweta

ये कहानी आपको 10 साल के पीछे के दौर और एक छोटे शहर में ले जाएगी। एक ऐसा शहर जहां मां बाप लड़कियों को पढ़ाते जरूर थे लेकिन शायद ही किसी लड़की को इंग्लिश मीडियमContinue reading

Poetry

Kiski Nazar Lag Gayi | Arvind Saxena

जाने किसकी हमें नज़र लग गयी बद्दुआ किसकी आज असर कर गयी छोटी छोटी सी बात गहरी होती गयी होंठ सिलते गए आँखें रोती रहीं मांगते भी तो क्या जवाब मांगते खुद हमारी ही शायदContinue reading

Lakeerein | Mid Night Diary | Maninder Singh
Poetry

Lakeerein | Maninder Singh

कुछ लकीरें खींचते खींचते कागज़ पर एक तस्वीर उभर आई लगा कोई अपना है पहचान वाला बिछड़ा हुआ घमखवार कोई उसकी आँखों में अपना माज़ी दिख रहा था मुझे उसकी खुशबू गुज़रे वक़्त का एहसासContinue reading

Poetry

Rakt-e-Safar | Ashwani Singh

मेरे रख्त-ए-सफ़र में लमहात के अलावा क्या था दिल के ताक़-ए-हरम में जलते चराग़ के अलावा क्या था साँसें हुई ज़र्रात सी सौ बार फ़िर भी रूह का सुकूँ अलहदा था शामें फ़िरदौस की होतीContinue reading

Poetry

Gustaakh Mureed | Nikita Raj Purohit

गुस्ताखी करने का इरादा न था हमारा, पर इस ज़बान ने सी कर इक लंबा अर्सा था गुज़ारा। अब जब सारा दर्द बिखेर ही दिया है, माफ़ कर जाने दो, कुछ इतना भी बुरा नहींContinue reading